‘पिता’ पर केंद्रित दोहा संग्रह ‘पिता छाँव वट-वृक्ष की’ एक उत्कृष्ट कृति है। इन दोहों में पिता का कोई पक्ष छूटा हो ऐसा दिखाई नहीं देता। राजेश जैन ‘राही’ का यह प्रयास अपने आप में अनूठा है और नई पीढ़ी के लिए दिशा-निर्देशक की भूमिका में है। निश्चित ही माँ-बाप का ऋण चुका पाना किसी के लिए संभव नहीं तथापि ‘पिता’ को भेंट किया श्री राही का यह उपहार अमूल्य है।
-अशोक अंजुम



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