‘पंछी यादों के’ का अपना आकाश है। यहाँ के रंग, तारे, ऊँचाइयाँ और दिव्यता मधुमन जी की रचनात्मकता के प्रभाव से है। यह मुग्धकारी है। ‘पंछी यादों के’ के ये अशआर अपने आकाश से निकल कर कब आपके आकाश में उड़ान भरने लगते हैं पता ही नहीं चलता। यही कमाल है कि समय के साथ ये नए आकाश तलाश लेते हैं और छा जाते हैं।
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