निगाहों के सागर / मो. नसीम अख़्तर

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नसीम अख़्तर कोमल प्रवृति के गजलकार हैं। इनकी ग़ज़लों का सौंदर्यबोध स्वतः ही पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।शब्दों का रख-रखाव और चयन; इनकी ग़ज़लों की ख़ास विशेषता है।यही इनके ग़ज़लों की पठनीयता का कारण भी है।
पाठक यह पूरी तरह से जनता है कि ग़ज़ल एक कोमल विधा है। कोमलता के साथ ही पाठकों के भीतर पाठ को लेकर छटपटाहट बनी रहती है। पाठ की कसौटी पर नसीम अख़्तर की ग़ज़लें पूरी तरह खरी उतरती हैं। ग़ज़ल की इस पहली शर्त को पार करते हुए जब नसीम अख़्तर समाज की ओर मुड़ते हैं तो इनकी ग़ज़लों का मुख्य स्वर समाज के दबे कुचले और शोषित लोगों के स्वर से जाकर मिल जाता है। यहाँ तक आते-आते इनके लेखन की सार्थकता स्वतः ही उद्घाटित हो जाता है। इस कसौटी पर नसीम अख़्तर की ग़ज़लों का उद्देश्य पूरा हो जाता है। कहा जा सकता है नसीम अख़्तर अपने समाज की बेहतर संभावनाओं के ग़ज़लकार हैं। मुझे उम्मीद है संग्रह की ग़ज़लें पाठकों के बीच लोकप्रिय होगीं और पढ़ी जाएँगी।

अनिरुद्ध सिन्हा

Author

मो. नसीम अख़्तर

Format

Paperback

ISBN

978-93-47306-50-1

Language

Hindi

Pages

112

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

ग़ज़ल

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