मन हुआ गोधूलि वेला / राघव शुक्ल

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राघव शुक्ल जी वर्तमान समय में अपने ही तरह के अनोखे व बहुआयामी गीतकार हैं, उनके पास अपनी मौलिक कथावस्तु, दृष्टि और कहन है। उनकी यह दृष्टि कभी आध्यात्मिक चेतना से संपृक्त मालूम पड़ती है तो कभी प्रेम और व्यवहारिकता से। ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे स्वयं मोह और मोहमुक्ति के मिलन बिंदु पर खड़े हैं, जो बिल्कुल उस गोधूलि वेला जैसा है जहाँ न तो पूर्ण उजाला होता है न ही पूरा अंधकार। यह ऐसी अवस्था है जो दिखाती है कि मन न संसार से पूरी तरह विमुख है और न पूरी तरह लिप्त।

Author

राघव शुक्ल

Format

Paperback

ISBN

978-93-47306-32-7

Language

Hindi

Pages

112

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

गीत

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