हिन्दी ग़ज़ल का परिसर और परिवेश / अनिरुद्ध सिन्हा

399.00

- +
Buy Now
Category: Tag:

हिन्दी ग़ज़ल पर केंद्रित अधिकांश आलोचनात्मक लेखन में प्रायः ग़ज़लों और शेरों की शिल्पगत व्याख्या, कथ्य-विवेचन और भाषिक संरचना को प्राथमिकता दी जाती रही है। ऐसी स्थिति में अनिरुद्ध सिन्हा की यह पुस्तक ‘हिन्दी ग़ज़ल का परिसर और परिवेश’ हिन्दी ग़ज़ल-आलोचना में एक भिन्न, मौलिक और विचारोत्तेजक हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है। इस कृति का केन्द्रीय आग्रह ग़ज़ल के पाठ से अधिक ग़ज़लकार के पाठ को समझने का है- उसके व्यक्तित्व, उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता, उसकी रचनात्मक पीड़ा और उसके भीतर चलने वाली निरंतर सर्जनात्मक प्रक्रिया को जानने का है।
लेखक ने इस पुस्तक में ग़ज़लों की व्याख्या तक स्वयं को सीमित न रखते हुए, उन परिस्थितियों और मानसिक संघर्षों पर प्रकाश डाला है जिनके बीच एक ग़ज़लकार अपनी रचना-यात्रा तय करता है। यह पुस्तक यह प्रश्न उठाती है कि शेरों में दिखाई देने वाली ऊर्जा, संवेदना और प्रतिरोध किन जीवनानुभवों से उपजते हैं। किन सामाजिक, वैचारिक और निजी मुसीबतों को साथ लेकर एक ग़ज़लकार अपने पाठकों को ऊर्जस्वित करता है; इस जटिल प्रक्रिया को लेखक ने गहराई से समझने और समझाने का प्रयास किया है।

Author

अनिरुद्ध सिन्हा

Format

Paperback

ISBN

978-93-47306-20-4

Language

Hindi

Pages

180

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

आलोचना

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “हिन्दी ग़ज़ल का परिसर और परिवेश / अनिरुद्ध सिन्हा”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart
Scroll to Top