‘हिन्दी बालसाहित्य : समीक्षा के निकष पर’ एक समीक्षात्मक अध्ययन होने के साथ-साथ एक विमर्श भी है जिसमें कहीं-कहीं हिन्दी बालसाहित्य की विधापरक पृष्ठभूमि के साथ-साथ पुस्तक के रचनाकार का परिचय दिया गया है। इस प्रयोग से सबसे अधिक लाभ उन शोधकर्ताओं को होगा जो पुस्तक के साथ-साथ रचनाकार के बारे में भी एक ही जगह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। संदर्भित इन पुस्तकों को पढ़ते हुए मैंने महसूस किया कि इनमें से कुछ ऐसे रचनाकार भी हैं जिन्होंने अपनी अलग सोच से हिन्दी के बालसाहित्य को महत्त्वपूर्ण दिशा देने का प्रयास किया है। इसके पीछे मंशा यह रही है कि पाठक इतिहास तो जानें ही, विभिन्न विधाओं की पुस्तकों को भी कसौटी पर परखने का प्रयास करें। लगभग डेढ़ सौ वर्षों के अपने इतिहास में बालसाहित्य के उतार-चढ़ाव की भी झलक इस पुस्तक में देखी जा सकती है।
यह पुस्तक एक प्रयोग के रूप में जागरुक पाठकों, शोधार्थियों और बालसाहित्य प्रेमियों को सौंपते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि हिन्दी बालसाहित्य के इतिहास में इसकी उपस्थिति से एक वातावरण तो बनेगा ही, भविष्य की नींव रखने में भी इससे सहायता मिलेगी।
-सुरेन्द्र विक्रम



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