‘गोरी धीरे पाँव उठाना’ शिव निश्चिन्त की विभिन्न विधाओं में लिखी गयी कविताओं का संग्रह है। यह किताब प्रकृति, देश और परिवार के साथ ही बीच-बीच में उस जीवन की यात्रा कराती है, जो अब अतीत बन चुका है। यह संग्रह एक दर्पण है उन भावनाओं का, जो हम कभी खो बैठते हैं, लेकिन वे हर क़दम हमारे साथ रहती हैं। यह हमारे दिलों को छूने के साथ-साथ हमारे आसपास की दुनिया को एक नयी दृष्टि से दिखाती है। जहाँ प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक गहरी संवेदना है, जो जीवन के हर मोड़ पर हमें मार्गदर्शन करती है।
| Author | Shiv Nishchint |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-49947-58-0 |
| Language | Hindi |
| Pages | 104 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |



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