हिन्दी के ग़ज़ल लेखन में प्रतिबद्धता के साथ बहुत कम महिला रचनाकार दिखती रही हैं। लेकिन पिछले दशक भर में इस स्थिति में बदलाव देखने में आया है। इधर कुछ युवा ग़ज़लकार आयी हैं, जिनके पास भाषा, कहन और कथ्य में स्पष्टता के साथ उनके लेखन का उद्देश्य भी सार्थक दिखा है। राजस्थान के पिण्डवाड़ा की नेहा ‘नेह’ इसी श्रेणी की रचनाकार हैं।
साधारण आदमी का जीवन-संघर्ष, एक महिला की रोज़मर्रा की जद्दोजहद और बेबाकी नेहा की ग़ज़लों को विशिष्ट बनाती हैं। घर-परिवार, रिश्ते-नाते, दफ़्तर-बाज़ार और देश-दुनिया सभी कुछ इस रचनाकार की दृष्टि में रहता है और इन्हीं सबके आसपास वह अपनी ग़ज़लों को बुनती हैं।
| Author | नेहा 'नेह' |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-47306-53-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 120 |
| Genre | ग़ज़ल |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



Reviews
There are no reviews yet.