दुष्यंत कुमार हिन्दी ग़ज़ल के उत्स हैं और हिन्दी ग़ज़ल की विकास-यात्रा के सूत्रधार। इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को अनेक कोण से समझने का प्रयत्न किया गया है। इनमें संकलित लेखों के ज़रिए पाठक सुदीर्घ हिन्दी कविता-परम्परा के एक अंग के रूप में हिन्दी ग़ज़ल को समझने की एक नई दृष्टि अवश्य अर्जित कर सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि इन ग़ज़लों में ऐसे वे कौन से उत्प्रेरक तत्व हैं, जो ‘हिन्दी ग़ज़ल’ को आज इतना सार्थक, प्रासंगिक, और व्यापक विधा बनाते हैं। दुष्यंत इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, कि वे अपनी रचनाओं में अपने ‘समय का स्वर’ बनते हैं। उनकी ग़ज़लों में मोटे तौर पर हमें तीन स्वर सुनाई देते हैं- एक प्रतिरोध का, दूसरा परिवर्तन का और तीसरा प्रेम का, आस्था का…
Books
दुष्यंत कुमार स्मरण एवम् विमर्श (Dushyant Kumar Smaran Evam Vimarsh / Edi. Hareram Sameep)
₹899.00
Author | एडिटर: हरेराम समीप |
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Format | Hardcover |
ISBN | 978-93-49136-23-6 |
Language | Hindi |
Pages | 448 |
Publisher | Shwetwarna Prakashan |
Hareram Sameep –
यह अपने तरह की ऐतिहासिक पुस्तक है। इसके जरिए आपातकालीन सामाजिक राजनीतिक परिस्थिति में हिन्दी में प्रतिरोध के ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था और उसके अगुआ थे क्रांतिकारी कवि दुष्यंत कुमार। अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।