चंदन वन / राजपाल सिंह गुलिया

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भारतीय सेना के बाद शिक्षा विभाग, हरियाणा से सेवानिवृत्त राजपाल सिंह गुलिया जी ग्रामीण संस्कृति में पले-बढ़े हैं और इसी कारण गंँवई-गांँव इनके रोम-रोम में रचे-बसे हैं। ‘चंदन वन’ संग्रह के अधिकतर गीत इसी भावभूमि की उपज हैं। इन गीतों में कहीं घर में ही वनवास का दंश भोगते बुढ़ापे की व्यथा है, तो कहीं गरीबी से ग्रस्त और अभावों से त्रस्त कृषकों-श्रमिकों की करुण कथा; कहीं बेरोजगारी के कारण दम तोड़ते सपनों की पीड़ा है, तो कहीं अपसंस्कृति के पैरों तले कुचले जा रहे जीवन-मूल्यों की वेदना। विषय और भी हैं, लेकिन सभी की अभिव्यक्ति और भाषा-शैली लगभग एक जैसी है, बिल्कुल सहज और सरल; एकदम मर्मस्पर्शी।

-डाॅ. रामनिवास ‘मानव’

Author

Rajpal Singh Guliya

Format

Hardcover

ISBN

978-93-49136-14-4

Pages

120

Language

Hindi

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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