यह संग्रह छंदमुक्त काव्य परंपरा को चुनौती देता है और दोहा छंद की सरलता, लयात्मकता एवं सारगर्भिता को दर्शाता है। सभी रचनाकारों ने विभिन्न विषयों के अतिरिक्त, अपने गृह राज्य झारखंड पर आधारित दस-दस दोहे भी सम्मिलित किए हैं। दोहा एक अर्द्धसममात्रिक छंद है, जिसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। दोहा छंद अपभ्रंश-काल से ही कवियों को प्रिय रहा है और इसकी शुरुआत छठी शताब्दी के कवि जोइंदु से मानी जाती है। इस संकलन को पूर्व विधानसभाध्यक्ष (झारखंड) श्री इंदर सिंह नामधारी जी, डॉ. अशोक प्रियदर्शी जी और डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र जी सहित अन्य साहित्यकारों का आशीर्वाद प्राप्त है। लेखकों ने मानव मूल्यों, सामाजिक अनुभवों, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और भक्ति जैसे विविध पहलुओं पर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया है। पुस्तक, विशेष रूप से छंद के व्याकरण और अभ्यास में रुचि रखने वाले साहित्य के नए पथिकों के लिए एक मील का पत्थर है।
| Author | सम्पादक : राकेश कुमार |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-47306-29-7 |
| Language | Hindi |
| Pages | 112 |
| Genre | दोहा |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



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