कमल चतुर्वेदी हिंदी गद्य लेखन के लिए नया नाम नहीं है। उनके दो संग्रह ‘स्मृतियों में रमते हुए’ (समग्र कृति) और ‘सरला मैडम के मिस्ड काॅल’ कहानी-संग्रह तथा ‘जाहि विधि राखे राम’ उपन्यास प्रकाशित है। पारंपरिक लेखन शैली से जुड़कर भी सदैव नयेपन की तलाश इनकी रचनाओं को कल आज कल से जोड़े रखती है। इनका पिछला उपन्यास जहाँ संशय और यांत्रिकता में जकड़ी इक्कीसवीं सदी की व्यथा-कथा थी वहीं वर्तमान उपन्यास सच्चे और निष्कलंक प्रेम की कथा यात्रा है। जातिगत संकीर्णताओं और पारिवारिक मान्यताओं में जकड़े प्रेम की यह कहानी अपनी संवाद शैली, भाषिक प्रवाह और कथावस्तु की रोचकता के साथ पाठकों के मन में स्थायी प्रभाव उत्पन्न करने वाली है।
प्रेम और उसकी महीन अनुभूतियों से गूँथी गयी यह कहानी जिज्ञासा पैदा करती है, आनंदित करती है तो निष्कर्ष की तलाश में व्याकुल भी। इस उपन्यास से गुज़रते हुए प्रेम का सामर्थ्य, क्षमा, हर्ष, विषाद सारे अनुभव पाठक को अपने से प्रतीत होंगे।
शारदा सुमन
सहनिदेशक, कविता कोश



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