‘अनहद की ओर’ डॉ. सपना मिश्रा का प्रथम काव्य संग्रह है किंतु रचनाओं की संवेदना और चेतना बहुत गहन, व्यापक एवं पुष्ट है। आरंभिक रचनाओं में ऐसी आशाएँ सामान्यतया कम की जाती हैं। कविताओं को पढ़ते हुए महसूस होता है कि कहीं छायावाद की काव्य ध्वनियों का मनोरम विन्यास है और कहीं अंतःकरण को आकुलित करने वाली प्रगतिशील चिंतन की सार्थक अभिव्यक्ति। इसी तरह पारलौकिक सत्ता के विराट व सर्वव्यापी स्वरूप का सृष्टि के कण-कण में दर्शन कवयित्री के आध्यात्मिक चिंतन का परिचायक है। संग्रह में अलग-अलग भावों-विचारों की कुल 46 कविताएँ हैं जो पठनीय हैं। इनकी भाषा शैली भी रुचिकर, सहज, सरल एवं बोधगम्य है। कहीं भी विद्वत्ता प्रदर्शन और दुरूहता का आग्रह नहीं दिखाई पड़ता।
डॉ. बेठियार सिंह साहू, छपरा
सहायक प्राध्यापक, हिंदी
राजेन्द्र महाविद्यालय,
जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, बिहार, भारत



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