आईने से पूछो / अविनाश भारती

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अविनाश का यह ग़ज़ल संग्रह, ग़ज़ल के शोर भरे वातावरण में नई आवाज़ की वह पुकार है जिसे अनसुना नहीं किया जा सकता है। उनकी चेतना के तार जनमानस से जुड़े हैं। आज की ग़ज़ल अपने समय के प्रत्येक आयाम के स्वभाव और हरकतों को समझती है और उन्हें बेबाकी से बयान करने में अपनी सार्थकता ढूँढती है। यह बेबाकी ग़ज़ल में जिस संतुलन की माँग करती है, उसे बनाए रखने का हुनर कम ही ग़ज़लकारों में होता है। संग्रह की प्रस्तुत ग़ज़लों में बेबाकी और संतुलन, दोनों हैं।
यह कहना आवश्यक है कि नई पीढ़ी के जिन ग़ज़लकारों ने सृजनात्मकता की नई दिशा पकड़ी है और अपने नूतन सौंदर्य बोध से ग़ज़ल को समृद्ध करने में योगदान दे रहे हैं अविनाश भारती उनमें अग्रणी हैं।

– विजय कुमार स्वर्णकार

Author

अविनाश भारती

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-40-5

Language

Hindi

Pages

104

Genre

ग़ज़ल

Publisher

Shwetwarna Prakashan

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