अंजना वर्मा का लघुकथा-संग्रह ‘तुम तो हो’ जीवन के साधारण प्रसंगों में छिपी असाधारण संवेदनाओं को उभारता है। संग्रह की इकहत्तर लघुकथाओं में पारिवारिक सम्बन्धों की ऊष्मा और अकेलापन, स्त्री की पीड़ा और स्वाभिमान, ग़रीबी की विवशता, सामाजिक विषमता तथा बदलते जीवन-मूल्यों के विविध रूप सामने आते हैं। लेखिका की संवेदना का विस्तार पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और उनके उजड़ते संसार तक है, जहाँ मनुष्य के विकास और उसकी संवेदनहीनता के बीच गहरे प्रश्न उठते हैं। सहज भाषा, स्वाभाविक संवाद और मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से कथाएँ पाठक को अपने आसपास के जीवन को अधिक सजग दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती हैं। विसंगतियों और विडम्बनाओं के बीच प्रेम, करुणा, सहअस्तित्व और अनायास मिलने वाले मानवीय सहारे का विश्वास संग्रह को आत्मीय बनाता है।
| Author | अंजना वर्मा |
|---|---|
| Format | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | 100 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कहानी |



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