यशोधरा : एक अरिहंता / डॉ. प्रीति धनखड़

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डॉ. प्रीति धनखड़ की ‘यशोधरा : एक अरिहंता’ नारी-मन की वेदना, आत्मसंघर्ष, विरह, आध्यात्मिक चेतना और आत्म-मुक्ति की आकांक्षा को अभिव्यक्त करने वाला बहुआयामी काव्य-संग्रह है। यशोधरा के ऐतिहासिक चरित्र को केंद्र में रखकर कवयित्री उस स्त्री की अनकही पीड़ा और प्रश्नाकुलता को स्वर देती हैं, जो त्याग और परित्याग के बीच भी अपनी आंतरिक शक्ति को अक्षुण्ण रखती है। संग्रह का भाव-संसार केवल यशोधरा तक सीमित नहीं रहता; राधा, मीरा, सीता, अनुसूया, भामती और अहिल्या जैसी स्त्री-छवियों के माध्यम से वह सदियों से चली आ रही नारी-संवेदना का व्यापक आख्यान रचता है। पुस्तक में नारी-वेदना के साथ ध्यान, साधना, गुरु-तत्त्व, पंचतत्त्व, स्वाध्याय, मुक्ति और परम-तत्त्व की आध्यात्मिक अनुभूतियाँ भी समानांतर प्रवाहित हैं। लेखिका स्वयं इसे भौतिक जीवन के कठिन प्रश्नों और आध्यात्मिकता की शीतल छाँव को रेखांकित करने वाली कृति मानती हैं। चार भाव-खंडों में विस्तृत यह संग्रह यशोधरा की वेदना से आरम्भ होकर अध्यात्म, पुनः नारी-जीवन की पीड़ाओं और अंततः जीवन की विविध अनुभूतियों तक पहुँचता है। इस दृष्टि से ‘यशोधरा : एक अरिहंता’ स्त्री के दुःख का मात्र काव्यात्मक अभिलेख नहीं, बल्कि वेदना से वैराग्य, वैराग्य से साधना और साधना से अंतस की मुक्ति की ओर बढ़ती चेतना की काव्य-यात्रा है।

Author

डॉ. प्रीति धनखड़

Format

Paperback

ISBN

978-93-47306-37-2

Language

Hindi

Pages

124

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

कविता

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