‘अक्स हूँ आईनों में रहती हूँ’ आत्मानुभूति, स्त्री-चेतना, प्रेम, स्मृति और जीवनानुभवों की गहरी रागात्मक अभिव्यक्ति का ग़ज़ल-संग्रह है। इन ग़ज़लों में मनुष्य के भीतर घटित होने वाले सूक्ष्म भाव-संसार को ऐसी भाषा मिली है, जो सहज भी है और प्रभावशाली भी। शायरा अपने समय के यथार्थ से आँख मिलाते हुए रिश्तों की ऊष्मा, अकेलेपन की टीस, आत्मसम्मान की चमक और उम्मीद की लौ को समान आत्मीयता से स्वर देती हैं।
इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संवेदनात्मक प्रामाणिकता है। यहाँ शिल्प और भाव एक-दूसरे के पूरक बनकर उभरते हैं। ग़ज़लें केवल व्यक्तिगत अनुभवों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समकालीन जीवन के अनेक प्रश्नों से संवाद भी हैं। प्रेम यहाँ आत्मविस्तार है, स्मृतियाँ आत्मपहचान हैं और संघर्ष जीवन के प्रति अटूट विश्वास का प्रमाण। यही कारण है कि यह संग्रह पाठकों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि बार-बार अपने भीतर लौटकर स्वयं को पहचानने के लिए आमंत्रित करता है।
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अक्स हूँ आईनों में रहती हूँ / योगिता ‘ज़ीनत’
Original price was: ₹399.00.₹299.00Current price is: ₹299.00.
| Author | योगिता 'ज़ीनत' |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-81-997250-9-6 |
| Language | Hindi |
| Pages | 120 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | ग़ज़ल |



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