‘तुमसे होकर…’ डॉ. मनीषा शर्मा का प्रथम काव्य-संग्रह है, जो प्रेम, स्त्री-अनुभूति, आत्मबोध, संबंधों की जटिलता और जीवन-दर्शन के विविध आयामों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त करता है। इस संग्रह में ‘तुम’ किसी एक व्यक्ति का संकेत नहीं, बल्कि उस चेतना का प्रतीक है जिसके माध्यम से कवयित्री स्वयं तक पहुँचने की यात्रा करती है। कृष्ण-सखा की आध्यात्मिक उपस्थिति, प्रेम की निर्मल अनुभूति, आत्मसम्मान का आग्रह, स्त्री-जीवन के संघर्ष, माँ-पिता का स्नेह, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संबंधों की सूक्ष्म पड़ताल इन कविताओं को विशिष्ट बनाती है। संग्रह की रचनाएँ केवल भावुकता का विस्तार नहीं, बल्कि अनुभव की परिपक्वता, आत्मसंवाद और जीवन के गहन सत्य की काव्यात्मक अभिव्यक्ति हैं।
| Author | डॉ. मनीषा शर्मा |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-69342-41-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 144 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |



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