मौन-प्रस्थान / डॉ. मनीष सक्सेना ‘ज़हर’

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‘मौन-प्रस्थान (आत्मा के अनन्त पदचिह्न)’ आत्मानुभूति, आध्यात्मिक चिंतन और मानवीय जीवन की गहन अर्थवत्ता का ऐसा काव्य-संग्रह है, जो पाठक को बाह्य जगत से उठाकर उसकी अंतःयात्रा की ओर ले जाता है। इस संग्रह की कविताएँ केवल भावाभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मबोध, मौन, मृत्यु, प्रकृति, समय, करुणा और चेतना के सूक्ष्म आयामों का काव्यात्मक अन्वेषण हैं। कवि जीवन के दृश्य-अदृश्य पक्षों को दार्शनिक दृष्टि से देखते हुए शब्दों के माध्यम से आत्मा और अस्तित्व के बीच सेतु का निर्माण करते हैं।

इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसका चिंतनप्रधान, किंतु अत्यंत संवेदनशील काव्य-स्वर है। यहाँ मौन निष्क्रियता नहीं, बल्कि आत्मसंवाद का माध्यम है; मृत्यु अंत नहीं, बल्कि अनन्त यात्रा का द्वार है; और जीवन निरंतर आत्म-विस्तार की साधना बनकर उपस्थित होता है। सरल किन्तु अर्थगर्भित भाषा, प्रतीकात्मक बिंब, आध्यात्मिक अनुभूतियों की गहराई तथा मानवीय संवेदनाओं की व्यापकता इस कृति को विशिष्ट बनाती है। ‘मौन-प्रस्थान’ केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि आत्मा के पदचिह्नों का अनुसरण करती हुई ऐसी साहित्यिक यात्रा है, जो पाठक को भीतर झाँकने, स्वयं से मिलने और जीवन के शाश्वत सत्य को अनुभव करने की प्रेरणा देती है।

Author

डॉ. मनीष सक्सेना ‘ज़हर’

Format

Paperback

ISBN

978-81-69342-83-4

Language

Hindi

Pages

144

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Genre

कविता

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