एक सजग अध्येता, सहृदय पाठक और साहित्यिक चेतना से सम्पन्न चिन्तक के रूप में कमलेश भट्ट कमल ने दीर्घकाल तक विविध विधाओं में लेखन तथा श्रेष्ठ कृतियों का अध्ययन किया है। वे उन विरल पाठक-आलोचकों में हैं, जिन्होंने आलोचना को केवल मूल्यांकन की प्रक्रिया न मानकर साहित्यिक संवाद का माध्यम बनाया है। उनका विश्वास है कि किसी भी रचना का वास्तविक मूल्य उसके कथ्य और उसकी सम्प्रेषणीयता के मध्य स्थापित उस संतुलन में निहित होता है, जहाँ साहित्य मनुष्य की मूलभूत संवेदनाओं का सम्मान करते हुए उसे आत्मबोध की किसी ऊर्ध्वतर भूमि तक ले जाने में समर्थ हो। उनका आलोचना-कर्म रचना के बाह्य शिल्प से अधिक उसके अन्तर्निहित मानवीय ताप, जीवन-दृष्टि और संवेदनात्मक ऊर्जा की खोज करता है।
कमलेश भट्ट कमल का दृढ़ विश्वास है कि श्रेष्ठ पुस्तकें मनुष्य के अन्तर्मन को आलोकित करती हैं, उसकी संवेदना को परिष्कृत करती हैं तथा उसे अधिक विवेकशील, सहृदय और विचारसम्पन्न बनाती हैं। यही कारण है कि उनका लेखन पाठक को केवल पुस्तकों की जानकारी नहीं देता, अपितु उसे अध्ययन की संस्कृति से जोड़ने का कार्य भी करता है। उनके भीतर का सजग पाठक ही उनके लेखक-व्यक्तित्व का सबसे उज्ज्वल पक्ष है।
प्रस्तुत कृति ‘किताबों की जगमग दुनिया’ इसी आलोचनात्मक दृष्टि का साक्ष्य है। इसमें संकलित आलेख प्रबुद्ध और संवेदनशील पाठक के आत्मीय पाठ-अनुभव हैं। रवीन्द्रनाथ ठाकुर, मिखाइल शोलोखोव, राही मासूम रज़ा, असगर वजाहत, रस्किन बॉन्ड, बलराम, हरेराम समीप तथा अन्य अनेक रचनाकारों की कृतियों पर विचार करते हुए कमलेश भट्ट ने उन मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक सन्दर्भों और जीवन-संवेदनाओं को रेखांकित किया है, जो किसी कृति को कालजयी बनाते हैं।
पाठकों को भी ज्ञान, संवेदना और साहित्य के आलोक से अनुप्राणित करने का सतत् प्रयत्न करते हुए कमलेश भट्ट ने कृति और पाठक के मध्य सेतु का कार्य किया है। उनकी आलोचना में विद्वत्ता है, किन्तु वह बोझिल नहीं; विश्लेषण है, किन्तु वह संवेदना से रिक्त नहीं; और मूल्यांकन है, किन्तु उसमें पूर्वग्रहों की कठोरता नहीं है।
सामीक्ष्य पुस्तकों के चयन के साथ ही उनके प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करती उनकी आलोचना पाठक को साहित्य के व्यापक और आलोकित संसार में प्रवेश करने की प्रेरणा भी प्रदान कर रही है।
-राहुल शिवाय



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