लोक संवेदना के स्वर : सत्यनारायण हिंदी और भोजपुरी साहित्य के प्रख्यात जनकवि सत्यनारायण के बहुआयामी व्यक्तित्व, रचनात्मक अवदान और लोकधर्मी चेतना को समर्पित एक महत्वपूर्ण अभिनंदन-ग्रंथ है। इस पुस्तक में उनकी कविताओं, नवगीतों, नुक्कड़ कविताओं, संस्मरणों, वैचारिक लेखों और सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित विस्तृत आलेख संकलित हैं, जो उन्हें केवल एक कवि नहीं, बल्कि जनचेतना के सशक्त स्वर के रूप में स्थापित करते हैं।
यह ग्रंथ सत्यनारायण की उस काव्य-दृष्टि को सामने लाता है, जिसमें लोकजीवन की पीड़ा, संघर्ष, प्रतिरोध, मानवीय करुणा और सामाजिक न्याय की आकांक्षा गहरे रूप में अभिव्यक्त हुई है। यह पुस्तक उनके साहित्यिक जीवन, बिहार राज्यगीत के रचयिता के रूप में उनकी भूमिका, लोकभाषा और लोकसंस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा समकालीन हिंदी कविता में उनके विशिष्ट स्थान का समग्र दस्तावेज प्रस्तुत करती है।




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