‘ज़िंदगी गीत है’ जयराम जय जी का प्रथम गीत-नवगीत-संग्रह है, लेकिन इसकी यात्रा दशकों की है। यह संग्रह जीवन-रस की सुषमा से अनुप्राणित एक सुसंवेद्य काव्य-यात्रा का साक्षात् रूप है। इस संग्रह के गीत-नवगीत मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ तथा जनजीवन के विविध आयामों का अत्यंत मार्मिक एवं प्रभावी चित्रण कर रहे हैं। जय जी ने परंपरा और नव्यता के समन्वित बोध से अपने गीतों को अर्थगर्भिता प्रदान की है। भाषा की सरसता एवं संप्रेषणीयता पाठक-हृदय में सहज स्पंदन उत्पन्न करती है। बिंब-विधान और प्रतीक-योजना काव्य को सौंदर्य एवं सार्थकता से समृद्ध करते हैं। रचनाओं में अंतर्निहित जनचेतना एवं युगबोध इसे नवगीत के दायित्वबोध से जोड़ते हैं। देर आये पर दुरुस्त आये की बात इस संग्रह के लिए कहना उचित ही होगा।
-राहुल शिवाय (बेगूसराय)




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