निवेदिता मिश्रा झा का कविता संग्रह ‘पृथ्वी’ मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और स्त्री अस्मिता की एक गहरी खोज है। हिंदी अकादमी, दिल्ली के सहयोग से प्रकाशित इस कृति में ७१ कविताएँ संकलित हैं, जिनमें कवयित्री ने प्रेम, पीड़ा और संघर्ष को बड़ी ही बेबाकी से उकेरा है। संग्रह की रचनाएँ केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं हैं, बल्कि ये झारखंड के जंगलों की सोंधी महक से लेकर महानगरों की मशीनी दौड़ और हाशिए पर खड़े मज़दूरों के अदृश्य दर्द तक का विस्तार करती हैं । जहाँ एक ओर ‘पिता’ और ‘माँ’ जैसी कविताएँ पारिवारिक जड़ों की महत्ता बताती हैं, वहीं दूसरी ओर ‘पृथ्वी’ के माध्यम से लेखिका ने स्त्री के धैर्य और उसकी असीमित शक्ति को रेखांकित किया है । सरल भाषा और विलक्षण बिम्बों से सजी ये कविताएँ समाज की विसंगतियों पर प्रहार करने के साथ-साथ पाठकों के मन में उम्मीद और आत्मचिंतन की लौ जलाती हैं ।
| Author | निवेदिता झा |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-81-997250-2-7 |
| Language | Hindi |
| Pages | 128 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |




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