हिन्दी ग़ज़ल के पथ पर समकालीन हिन्दी ग़ज़ल की यात्रा, उसकी वैचारिक भूमि और उसके प्रमुख रचनाकारों के रचनात्मक अवदान को समझने का एक गंभीर, संवेदनशील और विचारोत्तेजक प्रयास है। यह पुस्तक हिन्दी ग़ज़ल के पचास वर्षों की परंपरा को आधार बनाते हुए उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय सरोकारों का सूक्ष्म पाठ प्रस्तुत करती है।
गरिमा सक्सेना ने इस पुस्तक में दुष्यन्त कुमार से लेकर समकालीन पीढ़ी के ग़ज़लकारों तक की रचनात्मक यात्रा को आलोचनात्मक दृष्टि से देखा है। प्रत्येक लेख संबंधित ग़ज़लकार की विशिष्ट काव्य-दृष्टि, शिल्प-संरचना, भाषा और समय-बोध को सामने लाता है। ये लेख केवल मूल्यांकन नहीं करते, बल्कि हिन्दी ग़ज़ल की सामर्थ्य, उसकी सीमाएँ और उसकी भविष्य-दृष्टि को भी रेखांकित करते हैं।
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हिन्दी ग़ज़ल के पथ पर / गरिमा सक्सेना
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| Author | गरिमा सक्सेना |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-47306-11-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 234 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | आलोचना |




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