‘मधु सागर’ मधु ‘मधुमन’ जी की समृद्ध और बहुआयामी काव्य-साधना का सार है। यह कृति भावनाओं के अथाह समुद्र में उतरने का आमंत्रण देती है, जहाँ प्रेम, विरह, आशा, निराशा, जीवन-दर्शन और मानवीय संवेदनाएँ शब्दों की लहरों पर बहती हुई पाठक के हृदय तक पहुँचती हैं।
इस संग्रह में ग़ज़लें, नज़्में, गीत, दोहे, माहिया, मख़ुम्मस, घनाक्षरी छंद और मुक्तक जैसे अनेक काव्य रूपों का सुंदर समावेश है। भाषा की सरलता, भावों की गहराई और शिल्प की परिपक्वता इसे एक विशिष्ट साहित्यिक अनुभव बनाती है। उर्दू, हिंदी और लोक-स्वर का संतुलित संगम इस कृति को और भी प्रभावशाली बनाता है।
| Author | मधु ‘मधुमन’ |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93473-0638-9 |
| Language | Hindi |
| Pages | 260 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | कविता |




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