बूझ गया वो होशियार लेखिका किरण सिंह द्वारा रचित बच्चों के लिए एक रोचक, शिक्षाप्रद और मनोरंजक पहेली-संग्रह है। इस पुस्तक में बच्चों के मानसिक विकास, सोचने-समझने की क्षमता और जिज्ञासा को बढ़ाने के उद्देश्य से सुंदर और सरल भाषा में पहेलियाँ प्रस्तुत की गई हैं।
बूझ गया वो होशियार बच्चों को पढ़ने, समझने और दोस्तों के साथ ज्ञान साझा करने का अवसर देती है। यह पुस्तक मनोरंजन के साथ-साथ बुद्धि-विकास का सुंदर माध्यम है और बच्चों के लिए एक आदर्श उपहार।
| Author | किरण सिंह |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-47306-36-5 |
| Language | Hindi |
| Pages | 60 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | बाल पहेलियाँ |



vandana Bajpai –
आदि काल से हमारे समाज में बच्चों के बीच दादी-नानी द्वारा पूछी जाने वाली पहेलियाँ चलन में रहीं हैं । ये पहेलियाँ बच्चों के साथ समय बिताने के साथ-साथ ज्ञानवर्धन करने का एक सुंदर तरीका था। किरण सिंह जी इस पुस्तक के माध्यम से उसी पहेली विधा को नए अंदाज में इस तरह लेकर आईं है कि मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में जकड़े बच्चे भी इसके जादू में आएंगे और उनके माता-पिता भी। पुस्तक का नाम भी बहुत सुंदर है । जोर बूझने पर है । जिससे बच्चे में कौतूहल उत्पन्न हो और खेल-खेल में नई चीजें सीख भी जाए । इसमें हर पहेली के साथ चार चित्र हैं । मतलब बच्चा सही उत्तर को न सिर्फ चुनेगा बल्कि उसके आत्मीयता भी स्थापित करेगा। माता-पिता चाहें तो तीन गलत उत्तरों के बारे में भी चित्र देखकर कुछ जानकारी दे सकते हैं। इस आधार पर यह उत्तर क्यों नहीं है के साथ उसके गुण-धर्म भी बच्चे सीख जाएंगे। खास बात है कि श्वेतवर्णा प्रकाशन की प्रस्तुतीकरण की यह पहल बहुत सार्थक है । वहीं पुस्तक यह श्वेत-श्याम और रंगीन दोनों संस्करणों में उपलबद्ध है । जिसे माता-पिता अपनी सहूलियत से ले सकते हैं । मैं चाहूँगी कि अगर आपके घर या परिचितों में में छोटे बच्चे हैं तो यह पुस्तक उन्हें अवश्य दें ।