‘उर्दू अदीबों की दुनिया में’ कमलेश भट्ट कमल के उन लम्हों की स्मृतियाँ हैं जो उन्होंने उर्दू अदीबों के साथ या ज़िक्रो-फ़िक्र में गुज़ारे। ग़ज़ल क़ौल से ज़्यादा कैफ़िय्यत है। प्रस्तुत पुस्तक में क़ौल में कैफ़ियत देखने की कोशिश की गई है।
‘उर्दू अदीबों की दुनिया में’ वे अदीब भी मौजूद हैं, जिन्होंने ग़ज़ल और नज़्म के अलावा अन्य काव्य-रूपों को भी अभिव्यक्ति का साधन बनाया है। एक विधा या रूप से अन्य विधा या रूप में जाने का सबब भी आज का हिंदी का पाठक जानना चाहता है। किताब में वली से सरदार अनवर तक, चार सदियों का सृजन-समय समोने का प्रयास किया गया है। ऐसे में अदीब और अदब से ज़्यादा समकालीनता और सृजन का महत्व उजागर होता है। कमलेश भट्ट कमल निश्चय ही मुबारकबाद के मुस्तहक़ हैं। इसलिए भी कि हमारे ज़माने में, समय में सृजन-समय की प्रासंगिकता को जानना चाहने वाले कितने हैं? ऐसे में कमल जैसों का होना ग़नीमत है।
– शीन काफ़ निज़ाम
(पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार)
| Author | कमलेश भट्ट कमल |
|---|---|
| Format | Paperback |
| ISBN | 978-93-47306-96-9 |
| Language | Hindi |
| Pages | 284 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | आलोचना |




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