अग्निपथ पर भी टहलकर देखता हूँ मैं / सम्पादक – डॉ. भावना

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‘अग्निपथ पर भी टहलकर देखता हूँ मैं’ डॉ. अमर पंकज की प्रतिनिधि ग़ज़लों का संग्रह है। उनके अबतक तीन मौलिक ग़ज़ल-संग्रह: ‘धूप का रंग आज काला है’ (2020), ‘हादसों का सफ़र ज़िंदगी’ (2022) और ‘लिक्खा मैंने भोगा सच’ (2025) प्रकाशित हुए हैं। इन तीनों संग्रहों से उनके विशिष्ट ग़ज़लकार का जो स्वरूप उभरता है, इस संग्रह में उसकी पड़ताल की गयी है।

Author

Dr. Bhavna

Format

Paperback

ISBN

978-93-49947-84-9

Publisher

Shwetwarna Prakashan

Language

Hindi

Pages

128

Genre

ग़ज़ल

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