अज्ञेय के रचना संसार का अध्ययन मनोवैज्ञानिकता, वैयक्तिकता, आत्मनिष्ठता के क्षेत्र में अधिक हुआ है और इतने विशाल रचना संसार की सामाजिक संवेदना पर किसी का ख़ास ध्यान नहीं गया है। कहीं से भी यह जानने की कोशिश नहीं की गई कि उत्तर-आधुनिकता के इस युग में उनकी रचनाओं का वृहत्तर समाज के लिए क्या महत्व है? इस शोध के में अज्ञेय द्वारा रचित कथा-साहित्य के सामाजिक संवेदना पर प्रकाश डाला गया है, जिससे आज के टूटते परिवारों, दूर होते रिश्ते, दरकते विश्वासों के कारणों का पता चल सके या फिर इनके प्रतिकार हेतु कोई रास्ता मिल सके।
सात अध्यायों के इस पुस्तक में अज्ञेय के रचनाओं में वर्णित सामाजिकता को विस्तार से जानने की कोशिश की गई है।
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अज्ञेय के कथा-साहित्य में सामाजिक संवेदना / डॉ. आकांक्षा अग्रवाल
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| Author | डॉ. आकांक्षा अग्रवाल |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-49136-92-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 382 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |
| Genre | आलोचना |



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