डॉ. रेशमी पाण्डा मुखर्जी की आलोचना पुस्तक ‘डॉ. सुरेन्द्र विक्रमः सृजन के विविध आयाम’ महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। दस अध्यायों में विभक्त इस आलोचना ग्रंथ में सुरेन्द्र विक्रम के बाल साहित्य की प्रमुख विधाओं -कविता और कहानी के अतिरिक्त आलोचना, पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया है। उनसे लिया गया साक्षात्कार भी मूल्यवान है। डॉ. रेशमी ने सुरेन्द्र विक्रम के साहित्यिक उपलब्धियों को अनेक स्तरों पर मूल्यांकित करने का प्रयास किया है।
वस्तुतः लेखिका ने उन्हें समकालीन हिंदी बाल साहित्य में शोध और समीक्षा के उन्नायक के रूप में प्रतिष्ठित किया है। बाल साहित्य की गत्यात्मक आलोचना के मूल्य निर्धारण का श्रेय भी उन्हें दिया गया है। उन्होंने बहुत मनोयोग और पर्याप्त अध्ययन-अनुशीलन के बाद डॉ. सुरेन्द्र विक्रम के बाल-साहित्य, आलोचना और पत्रकारिता का विशद अवगाहन कर उसके विभिन्न साहित्यिक पक्षों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया है तथा अपनी महत्त्वपूर्ण स्थापनाएँ प्रस्तुत कर हिन्दी की बाल-साहित्य आलोचना का पथ प्रशस्त किया है। रेशमी जी का यह विश्लेषण न केवल सुरेन्द्र विक्रम के सृजन के विविध आयामों से हमें परिचित कराता है, बल्कि उनकी वैचारिकी और बाल साहित्य लेखन के मर्म को समझने की दिशा और दृष्टि प्रदान करने का सार्थक प्रयास है। बहुत सधी हुई भाषा और आलोचनात्मक समझ के साथ इस कृति का लेखन संभव हुआ है।




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