अपनी पहचान और नवीन पाठक वर्ग ढूँढने में प्रयत्नशील हिन्दी ग़ज़ल अपनी लोकप्रियता के बल पर आज सीधे-सीधे समसामयिक समस्याओं से टकरा रही है। हमारे हौसलों को उड़ान देकर अपने चाहनेवालों को आवाज़ दे रही है। ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ इसका बाँकपन मचलता है तो हज़ारों मील दूर बैठे लोग अपने आँसुओं की रंगत पहचानने लगते हैं। यह हमारी उदासियों का राज़दार भी है और ख़ामोशियों के सफ़र में हमारी ज़ुबान में हमारी हम-ज़ुबान भी। हाल जो भी हो यह हमारा दामन नहीं छोडती। इसकी अपनी ज़मीन है जो हमारे आस-पास जुड़ी है, जिस पर हर पल इसकी सम्वेदनाएँ विकसित हो रही हैं।
| Author | अनिरुद्ध सिन्हा |
|---|---|
| Format | Hardcover |
| ISBN | 978-93-49136-76-2 |
| Language | Hindi |
| Pages | 240 |
| Publisher | Shwetwarna Prakashan |



Reviews
There are no reviews yet.