किसी को ग़ज़ल मिलेगी, किसी को बहर
जज़्बात फूटा दिल का, उठ गई ये लहर
हौसलों के दम उड़ा आसमां में आजाद
न दाद की फ़िक्र, न आलोचनाओं का डर
-डॉ. अभिषेक कुमार
किसी को ग़ज़ल मिलेगी, किसी को बहर
जज़्बात फूटा दिल का, उठ गई ये लहर
हौसलों के दम उड़ा आसमां में आजाद
न दाद की फ़िक्र, न आलोचनाओं का डर
-डॉ. अभिषेक कुमार
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